श्री कृष्ण जन्माष्टमी प्रेम धर्म और सत्य की विजय का पर्व है: महंत विशाल गौड़ 

भारत त्योहारों और धार्मिक परंपराओं का देश है। इन्हीं पावन पर्वों में श्री कृष्ण जन्माष्टमी का विशेष महत्व है। यह पर्व भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में पूरे देश में श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जाता है। भगवान श्रीकृष्ण भगवान विष्णु के आठवें अवतार माने जाते हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मथुरा में हुआ था। उस समय अत्याचारी राजा कंस के अत्याचारों से जनता त्रस्त थी। कंस के अन्याय का अंत करने और धर्म की स्थापना के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने अवतार लिया। श्रीकृष्ण का जीवन हमें अनेक महत्वपूर्ण शिक्षाएँ देता है। बाल्यकाल में उनकी नटखट लीलाएँ गोपियों के प्रति प्रेम मित्रता का आदर्श और महाभारत के युद्ध में अर्जुन को दिया गया गीता का ज्ञान आज भी मानव जीवन के लिए प्रेरणादायक है। श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान कृष्ण ने कर्म, धर्म और सत्य का मार्ग अपनाने का संदेश दिया है। जन्माष्टमी के अवसर पर मंदिरों को सुंदर ढंग से सजाया जाता है। भक्त उपवास रखते हैं, भजन-कीर्तन करते हैं और रात्रि 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव मनाते हैं। कई स्थानों पर झांकियां सजाई जाती हैं तथा दही-हांडी जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।  श्री कृष्ण जन्माष्टमी केवल एक धार्मिक पर्व नहीं बल्कि सत्य की असत्य पर, धर्म की अधर्म पर और प्रेम की घृणा पर विजय का संदेश देने वाला पर्व है। हमें भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से प्रेरणा लेकर सत्य प्रेम कर्तव्य और मानवता के मार्ग पर चलने का संकल्प लेना चाहिए। जब-जब धर्म की हानि होती है, तब-तब भगवान किसी न किसी रूप में मानवता के कल्याण के लिए अवतरित होते हैं।महंत विशाल गौड़ ने कहा महाभारत के युद्ध में श्रीकृष्ण ने अर्जुन को जो उपदेश दिया वह आज भी सम्पूर्ण मानवता के लिए मार्गदर्शक है। श्रीमद्भगवद्गीता में उन्होंने कर्म ज्ञान और भक्ति का अद्भुत समन्वय प्रस्तुत किया। उनका संदेश था कि मनुष्य को फल की चिंता किए बिना अपने कर्तव्य का पालन करना चाहिए। श्रीकृष्ण का यह दर्शन आज के तनावपूर्ण और प्रतिस्पर्धात्मक जीवन में भी अत्यंत प्रासंगिक है। महंत विशाल गौड़ ने बताया जन्माष्टमी के अवसर पर मंदिरों को विशेष रूप से सजाया जाता है। भक्त उपवास रखते हैं, भजन-कीर्तन करते हैं और रात्रि बारह बजे भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव मनाते हैं। बाल गोपाल की झांकियां सजाई जाती हैं तथा उन्हें सुंदर वस्त्र और आभूषण पहनाए जाते हैं। अनेक स्थानों पर दही-हांडी का आयोजन भी किया जाता है, जो श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं की स्मृति को जीवंत करता है। श्री कृष्ण जन्माष्टमी हमें यह संदेश देती है कि जीवन में चाहे कितनी भी कठिनाइयाँ और चुनौतियाँ आएँ सत्य और धर्म का मार्ग कभी नहीं छोड़ना चाहिए। भगवान श्रीकृष्ण का व्यक्तित्व प्रेम, करुणा, मित्रता, कर्तव्य, नीति और नेतृत्व का अद्भुत संगम है। वे केवल एक आराध्य देव नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला सिखाने वाले महान मार्गदर्शक हैं। जन्माष्टमी का पर्व हमें अपने भीतर प्रेम सद्भाव सत्य और कर्तव्य की भावना जागृत करने की प्रेरणा देता है। आइए, इस पावन अवसर पर हम भगवान श्रीकृष्ण के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लें और समाज में प्रेम, शांति एवं भाईचारे का संदेश फैलाएं। Mahant Vishal Gawr Sri Kotvaleshver Maha dev Mander Chawk Lucknow

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