मंदिर का आध्यात्मिक महत्व : महंत विशाल गौड़
ईश्वर और मनुष्य के बीच संबंध स्थापित करने में है। श्री कोतवालेश्वर महादेव मंदिर के महंत विशाल गौड़ बताया यह केवल पूजा स्थल नहीं बल्कि आत्म-ज्ञान मानसिक शांति और आंतरिक ऊर्जा को संतुलित करने का माध्यम है। सनातन संस्कृति में मंदिर केवल पूजा-पाठ या प्रार्थना के स्थान मात्र नहीं हैं। ये मानसिक शांति आध्यात्मिक ऊर्जा और सामाजिक जुड़ाव के मुख्य केंद्र होते हैं। यहाँ बिताया गया समय व्यक्ति को तनाव से मुक्ति दिलाकर जीवन में सकारात्मकता और अच्छे संस्कार लाता है। मंदिर जाने का उद्देश्य मनुष्य को आध्यात्मिक शांति ईश्वरीय चेतना से जोड़ना और नैतिक मूल्यों का विकास करना है। यह एक ऐसा पवित्र स्थान है जहाँ व्यक्ति सांसारिक चिंताओं से मुक्त होकर ईश्वर की आराधना करता है और अपने भीतर सकारात्मक ऊर्जा व आत्म-मंथन को जागृत करता है ।
देवता या आपकी पूजा की मुख्य मूर्ति को मंदिर के केंद्र में रखा जाना चाहिए। यह केंद्रीय स्थान सुनिश्चित करता है कि यह आपके प्रार्थना कक्ष का केंद्र बिंदु है, जो आपके जीवन में देवत्व की केंद्रीय भूमिका का प्रतीक है। मंदिर जाना न केवल आध्यात्मिक और धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह मानसिक शांति और बेहतर स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी है। यह दैनिक जीवन की भागदौड़ से राहत दिलाकर सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है।
मंदिर में घंटा लगाने का कारण
जब भी मंदिर में प्रवेश किया जाता है तो दरवाजे पर घंटा टंगा होता है जिसे बजाना होता है। मुख्य मंदिर (जहां भगवान की मूर्ति होती है) में भी प्रवेश करते समय घंटा या घंटी बजानी होती है, इसके पीछे कारण यह है कि इसे बजाने से निकलने वाली आवाज से सात सेकंड तक गूंज बनी रहती है जो शरीर के सात हीलिंग सेंटर्स को सक्रिय कर देती है।
परिक्रमा का वैज्ञानिक कारण
अधिकांश मंदिरों में दर्शन करने और पूजा करने के बाद परिक्रमा करनी होती है। परिक्रमा 8 से 9 बार करनी होती है। जब मंदिर में परिक्रमा की जाती है तो सारी सकारात्मक ऊर्जा शरीर में प्रवेश कर जाती है और मन को शांति मिलती है।
आरती की लौ पर हाथ घुमाने का वैज्ञानिक कारण
आरती के बाद सभी लोग दिए पर या कपूर के ऊपर हाथ रखते हैं और उसके बाद सिर से लगाते हैं और आंखों पर स्पर्श करते हैं। ऐसा करने से हल्के गर्म हाथों से दृष्टि इंद्री सक्रिय हो जाती है और बेहतर महसूस होता है।
भगवान की मूर्ति
मंदिर में भगवान की मूर्ति को गर्भ गृह के बिल्कुल बीच में रखा जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस जगह पर सबसे अधिक ऊर्जा होती है जहां सकारात्मक सोच से खड़े होने पर शरीर में सकारात्मक ऊर्जा पहुंचती है और नकारात्मकता दूर भाग जाती है।
चप्पल बाहर क्यों उतारते है
मंदिर में प्रवेश नंगे पैर ही करना पड़ता है, यह नियम दुनिया के हर हिंदू मंदिर में है। इसके पीछे वैज्ञानिक कारण यह है कि मंदिर की फर्षों का निर्माण पुराने समय से अब तक इस प्रकार किया जाता है कि ये इलेक्ट्रिक और मैग्नैटिक तरंगों का सबसे बड़ा स्त्रोत होती हैं। जब इन पर नंगे पैर चला जाता है तो अधिकतम ऊर्जा पैरों के माध्यम से शरीर में प्रवेश कर जाती है।
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