क्या प्रदेश वालों में कम हो रही है दया की भावना?

अंग दान पर जागरूकता के प्रसार में जरूरी है लीडर्स और सेलिब्रिटी की भागीदारी

उत्तर प्रदेश में वर्ष 2018 में ब्रेन-डेड मरीजों के अंग दान की संख्या में 50 प्रतिशत से ज्यादा कमी  गई थी महाराष्ट्र (132), तमिलनाडु (137), तेलंगाना (167) और आंध्र प्रदेश (45) को तो छोड़िए राष्ट्रीय राजधानी अपने पड़ोसी संघ शासित क्षेत्र चंडीगढ़ (35) से भी काफी पीछेहै
प्रति वर्ष राजधानी में सड़क हादसों द्वारा ब्रेन डेड मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है उत्तर प्रदेश में हर साल लगभग 42568 सड़क हादसे होते हैं और बड़ी संख्या में लोगों के सिर पर गहरी चोटें लगने से क्लीनिकल ब्रेन डेथ के मामले सामने आते हैं दुनिया भर में माना जाता है कि ये बदकिस्मत लोग अंगों के संभावित दानकर्ता हैं प्रति मिलियन आबादी (10 लाख लोगों परपर 0.5 डोनर के साथ भारतदुनिया में सबसे कम अंग दान की दर वालेदेशों में से एक हैअतः स्कूली बच्चोंकॉर्पोरेट्स एवं सेलिब्रिटीज के बीच जागरूकता फैलाने की हर कोशिश से इस दिशा में मदद मिलती है
भारत में स्वास्थ्य और चिकित्सा सुविधाओं में व्यापक सुधार के बावजूद अंगों की अनुपलब्धता के चलते हर साल भारत में 5 लाख लोगों की मृत्यु हो जाती है ऐसे मरीज जिनके जीवित रहने के लिए प्रत्यर्पण ही अंतिम विकल्प हैउनके लिए देश में डोनर्स की भारी कमी कष्टकर हकीकत साबित होरही है डायरेक्टर  और  चेयरमैन डॉसंदीप अत्तावर (हृदय और फेफड़े कार्यक्रमकी अगुआई में ग्लेनईगल्स ग्लोबल हॉस्पिटल्स की हृदय और फेफड़ा प्रत्यारोपण टीम टीम को पिछले 25 महीने में 196 प्रत्यारोपण का श्रेय जाता हैइस प्रोग्राम का सफलता का मुख्य श्रेय टीम की विशेषज्ञता और क्षमता को जाता है इसके परिणामस्वरूप यह देश का एकमात्र ऐसा प्रोग्राम हैजोअंतरराष्ट्रीय स्तर के मानकों का पालन करते हुए बड़ी संख्या में हृदय और फेफड़ों के प्रत्यारोपण करने में और एक साल से अधिक अवधि तक मरीजोंको स्वस्थ रखने में सफल हुआ है
ग्लेनईगल्स ग्लोबल हॉस्पिटल्स के नेशनल फ्लैगशिप प्रोग्राम के तहत 78 हृदय, 75 लंग और 16 हृदय-फेफड़े का संयुक्त प्रत्यारोपण हो चुका हैजोदेश में बीते ढाई साल में अभी तक सबसे अधिक है इस प्रोग्राम का मुख्य जोर प्रत्यारोपण के लिए इंतजार कर रहे मरीजों के स्वास्थ्य में स्थिरतालाना है और ऐसे मरीजों को उपयुक्त विकल्प देना है जिन्हें प्रत्यारोपण की जरूरत नहीं है डॉसंदीप अत्तावर ने कहा इंटरनेशनल सोसायटी फॉरहार्ट एंड लंग ट्रांसप्लांटेशनमें प्रकाशित एक रिपोर्ट में प्रोग्राम की 85 प्रतिशत सफलता की दर की पुष्टि की गई है साथ ही हमारा हृदय और फेफड़ेप्रत्यारोपण प्रोग्राम अब पश्चिमी देशों के कुछ सर्वश्रेष्ठ केंद्रों के समान स्तर का स्थापित हो गया है
डॉअत्तावर ने कहाविभिन्न कारणों के चलते भारत में स्वास्थ्य के संकेतकों में खासी गिरावट के अलावा हृदय और लंग के फेल होने की वजहों मेंजेनेटिक असामान्यताएंइस्केमिक हृदय की बीमारियांमधुमेह (भारत को मधुमेह की राजधानी माना जाता है), धूम्रपान की आदतप्रदूषणतनावखानपान की खराब आदतोंमोटापे के स्तर में बढ़ोतरी और जीवनशैली से जुड़ी दिक्कतें शामिल हैं नतीजतनबीमारी के अंतिम चरण में पहुंचनेवाले मरीजों की संख्या खासी ज्यादा हो गई है जिनकी जिंदगी प्रत्यारोपण से ही बच सकती है भले ही 2018 के इप्सॉस सर्वे में 74 प्रतिशत भारतीयोंने माना कि वे जरूरतमंदों की मदद के लिए अपने अंगों को दान करने की अनुमति देंगेलेकिन भारत में मृतक दानदाताओं की दान की दर अभी भीमहज 0.34 प्रति मिलियन हैजो स्पेन (36), क्रोएशिया (35), अमेरिका (27.02) जैसे अन्य विकसित देशों की तुलना में काफी कम है हृदयप्रत्यारोपण के लिए सालाना 50,000 से ज्यादा और फेफड़े प्रत्यारोपण के लिए सालाना 20,000 से ज्यादा मरीजों की सूची के साथ प्रत्यारोपण केलिए प्रतीक्षा सूची और उपलब्ध अंगों के बीच खासा अंतर हैदक्षिण एशिया की सर्वश्रेष्ठ टीमों में से एक टीम शहरों में परिचालित ग्लेनईगल्सग्लोबल हॉस्पिटल्स में हृदय और फेफड़ों के प्रत्यारोपण के प्रोग्राम को आगे बढ़ा रही है
भारत में जागरूकता की कमीहैल्थकेयर सिस्टम पर भरोसे की कमीधार्मिक मान्यताएं और अंधविश्वास आदि ऐसी कई सामाजिक सांस्कृतिकवजह हैंजिनके कारण परिवार अंग दान के लिए सहमति देने से बचते रहे हैं ऐस हालात   में   डॉसंदीप नेशनल रजिस्ट्री फॉर ऑर्गन डोनर मेंपंजीकरण के महत्व और उसके सकारात्मक प्रभाव के बारे में बताते हैं सरकार के लिए जनता तक ज्यादा अंगों की जरूरतपरिजनों के साथ अंगदान पर चर्चाअंग दान की प्रक्रिया के बारे में फैली भ्रांतियां दूर करनेमृतकों के अंगदान को लेकर दृष्टिकोण में बदलाव लाने और बुनियादी ढांचे सेजुड़ी खामियों को दूर करने पर केंद्रित अभियान चलाने की जरूरत है
डॉअत्तावर एक निःस्वार्थ आशावाद को जाहिर करते हुए कहते हैंलीडर्ससेलिब्रिटी और हम सभी को बदलाव के एजेंट के रूप में जागरूकता फैलाने के प्रयास करने की जरूरत है सिर्फ समर्थन करने से कुछ नहीं होगाहमें अपने अंगों को दानहार्ट देने का संकल्प लेकर उदाहरण पेश करना होगासोचिएअगर देश के प्रमुखप्रसिद्ध राजनेता और सेलिब्रिटीज लोगों से कहें कि उन्होंने अपने अंग दान करने का संकल्प लिया है और वे दूसरों से भीऐसा करने का आह्वान करें तो इससे आमूलचूल बदलाव होगा और हजारों जिंदगियां बचाई जा सकेंगी भारत के दक्षिणी और पश्चिमी हिस्सों मेंजागरूकता का स्तर खासा ज्यादा हैजिसे हमें उत्तर भारतीय राज्यों में भी फैलाने की जरूरत है
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