टाटा पावर सोलर और बायो-सीएनजी माइक्रोग्रिड के साथ ऊर्जा स्वतंत्रता को सक्षम बनाता है

Basti उत्तर प्रदेश: उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक प्रेरणादायक कदम के रूप में, टीपी रिन्यूएबल माइक्रोग्रिड, जो टाटा पावर कंपनी लिमिटेड की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है, पसका बाजार में एक सार्थक रिन्यूएबल माइक्रोग्रिड पहल के माध्यम से ग्रामीण समुदायों के सतत परिवर्तन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत कर रही है। रिन्यूएबल सोलर माइक्रोग्रिड और बायोगैस आधारित समाधान के माध्यम से ग्रामीण भारत की ऊर्जा स्वतंत्रता जैसे गहरे विषय के साथ, यह परियोजना इस बात का उदाहरण है कि स्वच्छ ऊर्जा किस तरह ग्रामीण परिवारों के सामने आने वाली विशिष्ट चुनौतियों का समाधान कर सकती है। पसका उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के परसपुर ब्लॉक में स्थित एक गाँव है। यह जिला मुख्यालय से लगभग 35 किलोमीटर और राज्य की राजधानी लखनऊ से करीब 95 किलोमीटर दूर है। पसका में लगभग 2,500 परिवार निवास करते हैं। यह ग्रामीण समुदाय बिजली की अनियमित आपूर्ति की समस्या से जूझता है और काफी हद तक डीज़ल जनरेटर पर निर्भर है, साथ ही हर साल बाढ़ के मौसमी खतरे का भी सामना करता है। इन परिवारों के लिए डेयरी व्यवसाय आजीविका का एक महत्वपूर्ण आधार है, जो अक्सर कृषि के बाद दूसरे स्थान पर आता है। ऐसे में दूध का संग्रह, शीतलन और प्रसंस्करण इस समुदाय के लिए आय के प्रमुख स्रोत बन जाते हैं। इन आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए, टीपी रिन्यूएबल माइक्रोग्रिड ने दिसंबर 2020 में पसका गाँव में 30 kWp का सोलर माइक्रोग्रिड स्थापित किया, जिससे लगभग 150 उपभोक्ताओं को स्वच्छ, किफायती, विश्वसनीय और उच्च गुणवत्ता वाली बिजली उपलब्ध कराई गई। यह माइक्रोग्रिड किराना दुकानों, चाय की दुकानों, मिठाई की दुकानों, भोजनालयों, आटा चक्कियों और डेयरी संग्रह केंद्रों सहित कई प्रकार के व्यवसायों को समर्थन प्रदान करता है। एक ऐसे क्षेत्र के लिए, जो लंबे समय से अस्थिर ऊर्जा आपूर्ति की समस्याओं का सामना कर रहा है, यह पहल न केवल व्यवसायों के स्थिर संचालन को सुनिश्चित करती है, बल्कि उत्पादकता बढ़ाती है और आर्थिक विकास के नए अवसर भी खोलती है। साथ ही, यह हर वर्ष लगभग 16 टन CO₂ उत्सर्जन को कम करके पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान देती है। बाज़ार में बढ़ते लोड को देखते हुए सोलर क्षमता को बढ़ाकर 50 kWp कर दिया गया है। पसका बाज़ार क्षेत्रीय मिल्क वैल्यू चैन में एक महत्वपूर्ण केंद्र बन गया है, जहाँ आसपास के गाँवों से 5 से 10 किलोमीटर के दायरे में दूध एकत्र किया जाता है और उसे बल्क मिल्क कूलर्स (BMCs) में संग्रहित किया जाता है। बाज़ार में मौजूद पाँच BMCs में से दो वर्तमान में माइक्रोग्रिड से संचालित हो रहे हैं। क्षमता बढ़ाए जाने के बाद हाल ही में एक तीसरे BMC को भी माइक्रोग्रिड से जोड़ा गया है, जिससे दूध के लिए विश्वसनीय शीतलन सुनिश्चित हुआ है और खराब होने की संभावना कम हुई है। यह प्रगति न केवल डेयरी संचालन की दक्षता को मजबूत करती है, बल्कि समुदाय के किसानों और उद्यमियों को मानसिक सुकून भी देती है, जिससे वे अपने मुख्य कार्य—अपनी आजीविका को सशक्त बनाने और अपने परिवारों का समर्थन करने—पर ध्यान केंद्रित कर सकें। ग्रामीण समुदायों के लिए हरित भविष्य की दिशा में, टीपी रिन्यूएबल माइक्रोग्रिड विकेन्द्रीकृत छोटे पैमाने के बायोगैस समाधानों की खोज कर रहा है, जो व्यक्तिगत परिवारों को सशक्त बनाते हैं। यह पहल विशेष रूप से किसानों के लिए लाभकारी है, जिससे वे गोबर को कच्चे बायोगैस में बदलकर खाना पकाने के लिए उपयोग कर सकते हैं और जमीनी स्तर पर ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा सकते हैं। हाल ही में, पसका गाँव से लगभग 2 किलोमीटर दूर नयाबपुरवा बस्ती में 2 M³ क्षमता का एक बायोगैस संयंत्र स्थापित किया गया है, जो एक ऐसे परिवार की सेवा कर रहा है जो हर दिन पसका बाज़ार को ताज़ा दूध उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। ये पहलें केवल तकनीक तक सीमित नहीं हैं, बल्कि जीवन में बदलाव लाने से जुड़ी हैं। एलपीजी सिलेंडरों पर निर्भरता कम करके, परिवार न केवल आर्थिक बचत कर सकते हैं, बल्कि खाना पकाने के लिए स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग भी कर सकते हैं। इसके अलावा, बायोगैस संयंत्र से निकलने वाले अवशेष को जैविक खाद के रूप में खेतों में इस्तेमाल किया जा सकता है या स्थानीय बाज़ार में बेचा जा सकता है, जिससे अतिरिक्त आय के अवसर भी मिलते हैं। आगे की योजना के तहत, अविश्वसनीय बिजली आपूर्ति की समस्या से निपटने के लिए डीसेन्ट्रलाइड ग्राउंड-माउंटेड सोलर ऊर्जा समाधान शुरू करने पर विचार किया जा रहा है। इसके साथ ही, ऊर्जा-कुशल उपकरणों को बढ़ावा देकर आराम को बेहतर बनाने और ग्रामीण उद्यमियों के विकास को भी प्रोत्साहित करने की योजना है। टीपी रिन्यूएबल माइक्रोग्रिड का यह महत्वपूर्ण प्रयास टाटा पावर के “सस्टेनेबल इज़ अटेनेबल” अभियान के साथ पूरी तरह मेल खाता है। यह एक उदाहरणात्मक परियोजना है, जो दिखाती है कि डीसेन्ट्रलाइड रिन्यूएबल ऊर्जा समाधान किस प्रकार आर्थिक वायबिलिटी और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बना सकते हैं, साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका को भी सशक्त बना सकते हैं। इस पहल को वास्तव में अलग बनाता है इसका एकीकृत नवीकरणीय ऊर्जा मॉडल, जो सौर ऊर्जा और कृषि वेस्ट तथा पशु वेस्ट से प्राप्त बायो-सीएनजी को एक साथ जोड़ता है। यह समग्र दृष्टिकोण न केवल ऊर्जा की विश्वसनीयता को बढ़ाता है, बल्कि डीज़ल पर अत्यधिक निर्भरता और एलपीजी की कमी जैसी लगातार बनी रहने वाली चुनौतियों का भी समाधान करता है, जो व्यवसायों और परिवारों दोनों को प्रभावित करती हैं। लोकल वेस्ट को मूल्यवान ऊर्जा स्रोत में बदलकर, यह पहल एक सतत पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा दे रही है, जो पारंपरिक ईंधनों पर निर्भरता को कम करने और पर्यावरणीय नुकसान को न्यूनतम करने में मदद करती है। टीपी रिन्यूएबल माइक्रोग्रिड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, मनोज गुप्ता, सतत प्रभाव के लिए एक प्रेरणादायक दृष्टि प्रस्तुत करते हैं। वे कहते हैं, “टीपी रिन्यूएबल माइक्रोग्रिड में, हम विश्वसनीय और स्वच्छ ऊर्जा समाधानों के माध्यम से दीर्घकालिक परिवर्तन लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जो ग्रामीण समुदायों को सशक्त बनाते हैं। पसका बाज़ार माइक्रोग्रिड इस बात का उदाहरण है कि एकीकृत नवीकरणीय ऊर्जा कैसे स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को सशक्त बना सकती है, ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ा सकती है और पारंपरिक ईंधनों का एक व्यवहार्य विकल्प प्रदान कर सकती है। हमारी CSR और सस्टेनेबिलिटी पहलें स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने और उसके कुशल उपयोग—जैसे प्रकाश, शीतलन और खाना पकाने—को प्रोत्साहित करने की प्रतिबद्धता से प्रेरित हैं। साथ ही, हम आजीविका के अवसर सृजित करने और समुदायों में सतत ऊर्जा प्रथाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने का भी कार्य कर रहे हैं। सौर ऊर्जा और बायो-सीएनजी को एक साथ जोड़कर, हम तत्काल ऊर्जा चुनौतियों का समाधान करते हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में एक मजबूत, आत्मनिर्भर और कम-कार्बन भविष्य की दिशा में मार्ग प्रशस्त करते हैं। इस परियोजना का उद्देश्य पसका बाज़ार माइक्रोग्रिड को ग्रामीण इलेक्ट्रिफिकेशन के लिए एक विस्तार योग्य मॉडल के रूप में प्रस्तुत करना है, जो यह दर्शाता है कि स्वच्छ ऊर्जा समाधान किस प्रकार आर्थिक विकास को प्रेरित कर सकते हैं और साथ ही भारत के सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप भी हैं।

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