लखनऊ में जल प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए रोबोटिक्स और एआई आधारित सॉल्यूशन प्रोजेक्ट लॉन्च

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के कई शहरों में पानी का बर्बाद होना एवं प्रदूषित होना बड़ी चुनौती बना हुआ है। 28 लाख से ज्यादा निवासियों को पानी पहुंचाने वाले लखनऊ के वाटर डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (जल वितरण व्यवस्था) में अभी रोजाना 10 करोड़ लीटर से ज्यादा पानी बहकर बर्बाद हो जाता है। भूमिगत जल वितरण नेटवर्क में पाइप टूटने, लीक होने, पुरानी पाइप में जंग लगने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इन चुनौतियों को दूर करने और शहरी जल व्यवस्था को सुधारने के लिए लखनऊ नगर निगम, इमेजिन एच2ओ और सोलिनास इंटेग्रिटी प्राइवेट लिमिटेड ने द कोका-कोला इंडिया फाउंडेशन (टीसीसीएफ) के साथ मिलकर लखनऊ, उत्तर प्रदेश में इन-पाइप रोबोटिक्स एवं एआई-आधारित सॉल्यूशन प्रोजेक्ट लॉन्च किया है। डाटा आधारित एप्रोच की ओर शिफ्ट करते हुए इस पहल से रिपेयर में लगने वाला समय उल्लेखनीय रूप से कम होकर कई दिनों से मात्र दो घंटे में सिमट गया है। इससे दक्षता बढ़ी है और सेवा में व्यवधान कम हुआ है। इससे पानी के दूषित होने का खतरा कम हुआ है, जिससे वाटर सर्विस डिलीवरी पर लोगों का विश्वास मजबूत हुआ है। इस पहल को लेकर लखनऊ के नगर आयुक्त गौरव कुमार ने कहा इस रोबोटिक्स एवं एआई आधारित सॉल्यूशन से लखनऊ जैसे तेजी से बढ़ते शहर की बड़ी जरूरत को पूरा करने में मदद मिली है, जहां पुराने इन्फ्रास्ट्रक्चर पर ध्यान देने की जरूरत है। हम इस पहल को संभव बनाने की दिशा में कोका-कोला इंडिया फाउंडेशन के समर्थन की सराहना करते हैं। खामियां जल्दी ठीक होने, पानी के दूषित होने का खतरा कम होने और यूटिलिटी मैनेजमेंट बेहतर होने से लोगों को सीधा लाभ होता है। हम इस पहल को समर्थन देना और सहयोग करना जारी रखेंगे। उत्तर प्रदेश में शहरी विकास विभाग के सचिव रविंद्र कुमार ने कहा शहरी जल का दूषित होना बड़ी चिंता का कारण बना हुआ है। भारत के कई शहरों में ऐसी घटनाएं देखने को मिली हैं। एडवांस्ड टेक्नोलॉजी को अपनाने से इस तरह की घटनाओं को रोकना और वाटर सिस्टम की सुरक्षा एवं विश्वसनीयता को मजबूत करना संभव है। इस पहल से शहरों को बड़े पैमाने पर लाभ हो सकता है। इसके सफल क्रियान्वयन के लिए हम अपना पूरा समर्थन देंगे। कोका-कोला इंडिया एंड साउथवेस्ट एशिया की पब्लिक अफेयर्स, कम्युनिकेशंस एंड सस्टेनेबिलिटी वाइस प्रेसिडेंट देवयानी आरएल राणा ने कहा, ‘कोका-कोला में हमारा मानना है कि सार्थक प्रगति समाज द्वारा संचालित कदमों से ही हो सकती है और लंबे समय में जल सुरक्षा की मजबूती के लिए इस तरह की साझेदारियां महत्वपूर्ण हैं। जल संरक्षण पर हमारा प्रमुख फोकस है और विगत वर्षों में हमने रेनवाटर हार्वेस्टिंग, वाटरशेड डेवलपमेंट और पारंपरिक जल स्रोतों को रीस्टोर करने जैसी विभिन्न पहल को सपोर्ट किया है, जिससे सुरक्षित पानी तक पहुंच बेहतर हो और जहां जरूरी हो, वहां कम्युनिटी रेजिलिएंस को मजबूती मिले। साथ मिलकर ये साझा प्रयास लंबे समय में समाज में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। सोलिनास इंटेग्रिटी के सह-संस्थापक एवं सीईओ दिव्यांशु कुमार ने कहा नगर निगमों एवं यूटिलिटीज को बड़े पैमाने पर पानी से जुड़ी चुनौतियों को हल करने में मदद करने के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी आज की जरूरत है। साथ मिलकर काम करते हुए हम पानी की बर्बादी और उसके दूषित होने जैसी गंभीर समस्याओं को हल कर सकते हैं और सभी नागरिकों के लिए साफ सुरक्षित एवं भरोसेमंद पानी की सप्लाई सुनिश्चित कर सकते हैं। इस तरह के साझा प्रयास ऐसे मजबूत और टिकाऊ शहरी जल सिस्टम बनाने के लिए जरूरी हैं जो सचमुच जनता की जरूरतों को पूरा करें। हम पहले से ही 30 से ज्यादा शहरों के साथ काम कर रहे हैं और हमारा लक्ष्य साल के आखिर तक इस प्रयास को कम से कम 50 और शहरों तक पहुंचाना है। भारत सरकार की पहल अमृत 2.0 के अनुरूप यह पहल नॉन-रेवेन्यू वाटर को कम करने और इन्फ्रास्ट्रक्चर की एफिशिएंसी को बेहतर करने जैसी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं का समर्थन करती है। सरकारी नेतृत्व, वैश्विक विशेषज्ञता और डीप-टेक इनोवेशन को इंटीग्रेट करते हुए इस रोबोटिक्स एवं एआई द्वारा संचालित प्रोजेक्ट ने देश के विभिन्न शहरों में पानी की बर्बादी की समस्या के हल के लिए रेप्लिकेट किया जा सकने वाला फ्रेमवर्क बनाया है।

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