बसंत पंचमी अबूझ मुहूर्त की श्रेणी में आता है : महंत विशाल गौड़

बसंत पंचमी का पौराणिक महत्व है
23 जनवरी को बसंत पंचमी है. यह अपने आप में साल का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त भी है. इसलिए इस दिन विवाह या अन्य मांगलिक कार्य करने के लिए मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं होती है। चौक कोतवालेश्वर महादेव मंदिर के महंत विशाल गौड़ ने बताया कि द्रिक पंचांग के अनुसार बसंत पंचमी हर वर्ष माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाती है। वर्ष 2026 में बसंत पंचमी का पर्व 23 जनवरी, शुक्रवार को मनाया जाएगा। बसंत पंचमी पर मां सरस्वती की पूजा का मुहूर्त 23 जनवरी को सुबह 7 बजकर 33 मिनट से शुरू होकर दोपहर 12 बजकर 33 मिनट तक रहेगा। ज्योतिषियों के अनुसार, यह दिन खास इसलिए माना जाता है क्योंकि यह दिन अबूझ मुहूर्त की श्रेणी में आता है, यानी बसंत पंचमी को बहुत ही शुभ माना गया है इस दिन कोई भी शुभ कार्य किया जा सकता है। महंत ने बताया कि सरस्वती पूजा, जिसे बसंत पंचमी के नाम से भी जाना जाता है। हिंदू समुदाय में बसंत पंचमी का पर्व सरस्वती पूजा के साथ मनाया जाता है, जो ज्ञान, विद्या और कला की देवी सरस्वती को समर्पित है। बसंत पंचमी पर पीले रंग के कपड़े पहनने से सकारात्मक ऊर्जा और सौभाग्य प्राप्त होता है, ऐसा माना जाता है। इस त्योहार पर पीले रंग का खूब महत्व है। इसलिए इस दिन लोग मां सरस्वती को पीले रंग की मिठाइयों का भोग लगाते हैं और खुद भी पीले रंग के कपड़े पहनते हैं। पीला रंग सकारात्मकता, ऊर्जा और खुशहाली प्रतीक माना जाता है। इसलिए वसंत पंचमी पर पीले रंग के कपड़े पहनना काफी शुभ माना जाता है। केसरिया मीठे चावल - मां सरस्वती को पीला रंग बहुत प्रिय है, क्योंकि यह रंग पवित्रता, नई ऊर्जा और ज्ञान का प्रतीक है। यही वजह है कि बसंत पंचमी पर मुख्य रूप से केसरिया मीठे चावल का भोग लगाया जाता है। बसंत पंचमी के दिन, देवी सरस्वती को प्रसाद के रूप में विभिन्न खाद्य पदार्थ तैयार किए जाते हैं। इनमें बेर, गाजर, खिचड़ी, बूंदी, गुड़ वाले चावल और पंचामृत जैसे मौसमी फल शामिल हैं। सरस्वती जी का आशीर्वाद लेने के लिए इस मंत्र का नियमित जाप करने से विद्या, बुद्धि और ज्ञान में वृद्धि होती है। मंत्र: ॐ ऐं ह्रीं क्लीं महासरस्वती देव्यै नमः। साधारण मंत्र: आप इस मंत्र का भी जाप कर सकते हैं, जो सरल और अत्यंत प्रभावी है। मंत्र: ॐ सरस्वती नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणि। यह शक्तिशाली वैदिक प्रार्थना है जिसे ज्ञान, एकाग्रता और स्मरण शक्ति बढ़ाने के लिए जपा जाता है, जिसमें देवी सरस्वती और भगवान गणेश से बुद्धि और विवेक की प्रार्थना की जाती है, जैसे 'या देवी सर्वभूतेषु बुद्धि-रूपेण संस्थिता' और 'ॐ ऐं ह्रीं श्रीं वाग्देव्यै सरस्वत्यै नमः' प्रमुख हैं, जिससे पढ़ाई-लिखाई और जीवन के हर क्षेत्र में सफलता मिल सके। सफलता के लिए श्रद्धा के साथ, पवित्र सरस्वती वंदना का पाठ शुरू करें, प्रत्येक शब्द हृदय से प्रवाहित होकर देवी की दिव्य उपस्थिति का आह्वान करे। देवी सरस्वती को जीवंत, सुगंधित फूल अर्पित करते हुए, उनकी कृपा की वर्षा को महसूस करें, जो आपके मन को ज्ञान और अनुग्रह से भर देगी। जब आप वाणी के नियमों का पालन करते हैं, तो माँ सरस्वती आप पर प्रसन्न होती हैं। वे आपकी वाणी को ऐसी शक्ति प्रदान करती हैं कि आपके बोले गए शब्द इच्छित प्रभाव उत्पन्न करते हैं और जिनके लिए बोले जाते हैं, उनके लिए लाभकारी सिद्ध होते हैं! महंत विशाल गौड़ ने बताया कि बुद्धि तेज करने के लिए कई शक्तिशाली मंत्र हैं, जिनमें गायत्री मंत्र ("ॐ भूर्भुवः स्वः...") एकाग्रता और निर्णय शक्ति बढ़ाता है, गणेश मंत्र ("गम गणपतय नमः") बुद्धि विकास में सहायक है, और बृहस्पति (बुध) मंत्र ("ॐ सौम्यरूपाय विद् महे...") भी लाभकारी माना जाता है, जो मानसिक क्षमता को बढ़ाता है. इन मंत्रों के साथ प्राणायाम और एकाग्रता का अभ्यास करने से मानसिक शक्ति बढ़ती है शास्त्रों के अनुसार बसंत पंचमी के दिन महादेव की तिलक की रस्म निभाई गई थी। माना जाता है कि माता पार्वती से शादी करने से पहले इस दिन उनकी सगाई हुई थी। माघ मास की पंचमी तिथि के दिन ही देवताओं द्वारा महादेव का तिलक किया गया था। इसके बाद महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। लोग पीले (सफेद) वस्त्र पहनकर, मिठाई खाकर और घरों में पीले फूल सजाकर इस दिन को मनाते हैं। राजस्थान में चमेली की माला पहनना एक परंपरा है। महाराष्ट्र में नवविवाहित जोड़े शादी के बाद पहली बसंत पंचमी पर मंदिर जाकर पूजा-अर्चना करते हैं। इस दिन उल्लास के लिए कुछ लोग पतंग भी उड़ाते हैं या अपने पड़ोसी की पतंग काटने की प्रतियोगिता में भाग लेते हैं। देवी सरस्वती को सरसों और गेंदे के फूल अर्पित करें। माता-पिता इस दिन से अपने बच्चों को पढ़ाना या सिखाना शुरू कर सकते हैं, जिसे विद्या आरंभ के नाम से भी जाना जाता है। Mahant Vishal Gawd chawk Kotwalishver Mandie Lucknow

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