राज्य भंडारण निगम में हो रहे तबादलों से कर्मियों में रोष

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार का सहकारिता भर्ती घोटाला 2014 की धूल अभी साफ भी नही हो पाई थी कि यूपी राज्य भंडारण निगम में हो रहे दर्जनों तबादलों के चलते निगम में कार्य कर रहें कर्मियों का एक और आंतरिक विद्रोह उभर कर सामने आने लगा है। उत्तर प्रदेश राज्य भंडारण निगम के अलग-अलग जिलों व क्षेत्रों में बने भंडार गृहों व डिपो में कार्यरत कर्मचारियों का कहना है कि निगम के उच्च पद के अधिकारी उनके साथ द्वेश भावना के साथ व्यवहार कर रहें हैं वर्षों से फ ील्ड में रहने के बावजूद प्रधान कार्यालय में बैठे उच्च अधिकारी उनका स्थानान्तरण एक जिले से दूसरे जिले में बेवजह किया जा रहा है जबकि इसके विपरीत राज्य भंडारण निगम के प्रधान कार्यालय में लंबे समय से एक ही पटल पर जमे कर्मियों व अधिकारियों का न तो कभी स्थानान्तरण होता है और न कभी दुव्र्यवहार। इस समय गेहूँ खरीद का आखरी माह का आखरी सप्ताह चल रहा है हर वर्ष गेहूँ खरीद से पहले ही भंडारण निगम गेहूँ खरीद की रिकार्ड तोड़ उत्पादन को लेकर कई तरह की व्यवस्था करता है लेकिन वरिष्ठ भंडार अधिक्षकों की कमी को देखते हुए गेहूँ खरीद में भंडार निगम के वरिष्ठ भंडार कर्मियों का फ ील्ड में जाकर भंडार डिपो का चार्ज न लेकर विभागीय गठजोड़ कर अपने से कम अनुभवी और छोटे कर्मचारियों को भेजकर उसका शोषण करते हैं इसका एक दूसरा कारण ये भी होता है कि हर वर्ष गेहूँ खरीद में वरिष्ठ भंडार अधिक्षकों की कम रुचि लेने के चक्कर में नुकसान होता देखा गया है। प्रदेश के अलग-अलग जिलों की फ ील्ड में कार्य कर रहे कर्मियों का कहना है कि भंडार निगम के अलग अलग जिलों में बने भंडार डिपो में एक बड़े फ ील्ड स्तर पर वरिष्ठ भंडार अधिक्षकों एवं वरिष्ठ भंडार सहायकों की अत्यंत आवश्यकता है लेकिन उनकी जगह पिछले 20 वर्षों से भंडार डिपो पर हर जगह हर कही लगातार कनिष्क कार्यलय सहायक को भंडार डिपो का सम्पूर्ण चार्ज देकर केवल खानापूर्ति पूरी करते हुए पूरे यूपी में एक तरह से काम चलाया जा रहा हैं क्योंकि कोई भी वरिष्ठ अधिकारी के साथ वरिष्ठ भंडार अधिक्षक या सहायक भंडार गृह अधिक्षक फ ील्ड में जाने को तैयार नहीं। भंडारण निगम के प्रबंध निदेशक श्रीकांत गोस्वामी का कहना है कि पिछले वर्ष से बंद स्थानांतरण प्रक्रिया पर अब सरकार ने रोक हटा दी है जिसके साथ ही अब आगे हमारी प्रथम प्राथमिकता रहेगी कि एक ही पटल और एक ही जिले में वर्षों से कार्य कर रहे वरिष्ठ भंडार अधिक्षकों व सहायक भंडार अधिक्षकों को प्रदेश के विभिन्न जिलों में बने भंडार गृहों का सम्पूर्ण चार्ज देकर उन्हें भी फ ील्ड में भेजकर निगम हित में कार्य लिया जाएगा। देखना है कि भंडारण निगम के प्रबंध निदेशक गोस्वामी सीएम योगी सरकार द्वारा जारी गाइडलाइंस पर कितना अमल करवाते हैं। सीएम योगी की सरकार बनते ही उन्होंने अपने दिशा निर्देशों में कठोर शब्दों में साफ कह दिया था कि जो भी अधिकारी और कर्मचारी एक जिले के कार्यालय में तीन या पाँच वर्ष से अधिक समय पूरा कर चुके है उन्हें स्थानीय जिले से हटाकर फ ील्ड में भी भेजा जायेगा। लंबे समय से एक ही क्षेत्र या पटल पर जमे कर्मी इस व्यवस्था से हट जाएंगे। बतातें चलें कि मौजूदा प्रदेश सरकार ने स्थानान्तरण सत्र 2020.21 में कोविड.19 महामारी की वजह से स्थानांतरण पर अगले आदेश तक रोक लगा दी थी जिसकी वजह से पूरे सत्र तबादले नही किये जा सके थे लेकिन अब वो रोक हट चुकी हैं। भंडारण निगम के कुछ रसूखदार कर्मचारी, जिन्होंने प्रधान कार्यालय के वातानुकूलित एसी चैंबरों के अलावा आज तक कभी दूसरे जिलों में बने भंडार डिपो में जाकर कभी फील्ड का अनुभव ही नही लिया* नाम-महेंद्र कुमार, पद-वरिष्ठ भंडार अधिक्षक, वर्ष 2003 से तैनाती प्रधान कार्यालय नाम-सय्यद कलीमुल्लाह हाशमी, पद-वरिष्ठ भंडार अधिक्षक, वर्ष 2007 से तैनाती प्रधान कार्यालय नाम-सचिन अग्रवाल, पद-भंडार अधिक्षक, वर्ष 2011 से तैनाती प्रधान कार्यालय नाम-सतीश चंद्र, पद-भंडार अधिक्षक, वर्ष 2010 से तैनाती प्रधान कार्यालय नाम-राकेश कुमार, पद-भंडार अधिक्षक, वर्ष 2002 से तैनाती प्रधान कार्यालय नाम-ताज मोहम्मद, पद-भंडार अधिक्षक, वर्ष 2012 से तैनाती प्रधान कार्यालय नाम-राकेश कुमार रस्तोगी, पद-वरिष्ठ भंडार अधिक्षक, वर्ष 1993 से तैनाती प्रधान कार्यालय नाम-दिनेश कुमार मिश्रा, पद-वरिष्ठ भंडार अधिक्षक, वर्ष 2003 से तैनाती प्रधान कार्यालय नाम-कमल पालीवाल, पद-वरिष्ठ भंडार अधिक्षक, वर्ष 2006 से तैनाती प्रधान कार्यालय नाम- सुनील कुमार, पद-वरिष्ठ भंडार अधिक्षक, वर्ष 2007 से तैनाती प्रधान कार्यालय नाम-राज किशोर पाल, पद-वरिष्ठ भंडार अधिक्षक, वर्ष 2010 से तैनाती प्रधान कार्यालय 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

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