प्रदेश से चार प्रधानमंत्री पद के दावेदार मैदान में, मोदी के साथ राजनाथ, राहुल और माया भी दौड में

हुजैफ़़ा

लखनऊ। प्रदेश में देश के अगले प्रधानमंत्री पद के चार उम्मीदवार चुनावी मौदान में अपने-अपने दावें कर रहे है। अपनी महत्वांकाशी पूरी करने के लिये प्रदेश की ८० सीटों में से जिस पार्टी को आधे के बराबर सीटे मिलेगीं उसकी दावेदारी केन्द्र में मजबूत मानी जायेगी। प्रधानमंत्री पद के पहले दावेदार भाजपा के वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी है, जो अति उत्साह के साथ अपने प्रदेश के अलावा उत्तर प्रदेश में कई धमाकेदार रैलियों से विपक्षियों को अपनी रणनीति बदलने और अपनी दमदार प्रदेश में उपस्थिति दर्ज कराकर अपने विरोधियों को अपने होने का एहसास करा रहे है। प्रधानमंत्री पद के दूसरे दावेदार भी भाजपा से लखनऊ के सांसद गृहमंत्री राजनाथ सिंह जो अटल बिहारी बाजपेई की सीट जिसे पिछले साल पांच सालों से संभाले है, वह नवाबों के शहर में अपनी जीत से प्रधानमंत्री पद की दावेदारी पेश कर सकते है यदि भाजपा की सरकार नहीं बनती और पार्टी अन्य पार्टियों से समर्थन लेकर सरकार बनाये तो ऐसे में राजनाथ एनडीए की ओर से प्रधानमंत्री पद के दावेदार हो सकते है। तीसरा नाम आता है कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष  राहुल गांधी का जिन्होने अब तक कोई जिम्मेदारी नहीं ली फिर भी वह कांग्रेस पार्टी की ओर से सबसे प्रबल प्रधानमंत्री पद के दावेदार माने जा रहे है। चौथा नाम आता है बहुजन समाज पार्टी की सुप्रिमों मायावती का। प्रदेश में सपा गठबंधन की ओर से प्रधानमंत्री बनने के सपने देख रही है। उन्होने पिछली सभी कडवाहटों को भुलाकर सपा से हाथ मिलाया और मिशन-१९ पर मोर्चे की संभवनाओं को जीवित रखते हुए अपना मजबूत दावा पेश करते हुए भीषण गर्मी में प्रदेश में महागठबंधन को पहले स्थान पर लाकर इसे और मजबूती दे रही है। उनका दावा है कि सपा-बसपा ने गत सरकारों में जो विकास प्रदेश के लिये किया वहीं विकास वह सत्ता में आने के बाद पूरे देश में करेगी। अपनी पिछली योजनाओं का लाभ पात्रों को दिया उससे उनको दिल्ली की सियासत में मजबूत दावेदारी मिलेगी। यदि सब ठीक रहा तो वह देश की प्रघानमंत्री भी बन सकती है। बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती जो महात्वांकांशी होने के साथ अपनी शर्तों पर राजनीति करती और उनके कानून व्यवस्था और शासन की लोग आज भी मिसाल देते है। यह तो सभी पार्टियों के अपने आंकडे और आंकलन है किन्तु अब मतदाता पहले की अपेक्षा पार्टी, प्रत्याशी और उनके घोषणापत्र को भी देखकर अपने मताधिकार का प्रयोग करते है। अब देखना होगा कि देश के मतदाता किसको देश की शीर्ष सत्ता पर बिठाते है। प्रधानमंत्री कोई भी बने किन्तु उत्तर प्रदेश के चुनावी परिणाम पर सभी की नजरें रहती है और यहां की राजनीतिक तस्वीर देश की दिशा जरुर तय करती है। 

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