कोविड मैनेजमेंट इंडिया पर वेबिनार

लखनऊ,  प्रमुख वैश्विक दवा कंपनी सिप्ला द्वारा 'प्रैक्टिकल एप्रोच ऑन कोविड मैनेजमेंट इंडिया' पर वेबिनार आयोजित किया गया। इस अवसर पर मुख्य वक्ता लखनऊ के मिडलैंड हेल्थकेयर एंड रिसर्च हॉस्पिटल के निदेशक और सीनियर रेस्पिरेटरी कंसलटेंट, डॉ बी पी सिंह रहे। उन्होंने कोविड-19 रोगियों के इलाज में फेविपिराविर ड्रग की भूमिका पर चर्चा की।

 

डॉ बी पी सिंह ने वर्तमान में कोविड महामारी की स्थिति पर अपनी पारदर्शिता साझा की और साथ ही उन्होंने कोविड-19 रोगियों के इलाज में फेविपिराविर दवा की भूमिका को समझाया। उन्होंने कहा, "केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने कोविड-19 उपचार के लिए पिछले महीने में पांच दवाओं को मंजूरी दी है - दो एंटीवायरल - रेमेडिसविर और फेविपिराविर - और लक्षणों को कम करने के लिए तीन दूसरी दवाइयाँ डेक्सामेथासोन, टोसिलीज़ुमाब और इटोलिज़ुमाब हैं। फेविपिराविर, इस दवा का उपयोग इन्फ्लूएंजा के इलाज के लिए सबसे पहले 2014 में जापान में किया गया था। यह एक ओरल दवा है जिसे सीडीएससीओ द्वारा 19 जून को हल्के व मध्यम संक्रमण वाले कोविड-19  रोगियों के इलाज के लिए स्वीकृती प्रदान की जा चुकि है। फेविपिराविर का निर्माण और विपणन सबसे पहले भारत में ग्लेनमार्क फार्मास्युटिकल्स द्वारा किया गया था; हालाँकि फेविपिराविर को केवल आपातकालीन उपयोग के लिए डीजीसीआई द्वारा प्राधिकरण प्राप्त हुआ है। इसकी खुराक को बीमारी की शुरूआती चरण के दौरान सबसे प्रभावी पाया गया है, अर्थात; रोगी कोविड-19 के पहले चरण में पाए जाने वाले लक्षणों के दौरान अगर फेविपिराविर की खुराक लेता है बीमारी को वहीं से आगे फैलने से रोका जा सकता है। हलाकि इसके कुछ साइड इफेक्ट्स भी हैं और खुराक को मॉनिटर करके ही देना चाहि। इसे लिवर की बीमारियों से जूझ रहे रोगियों, गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को देने से पहले जांच लेना अत्यधिक आवश्यक है।

 

रोहिलखंड मेडिकल कॉलेज, बरेली के पल्मोनरी डिपार्टमेंट के एचओडी डॉ राजेश अग्रवाल द्वारा मॉडरेडेट किये गए इस सेशन में भारत के कई जाने माने विशेषज्ञ भी थे। जिनमें रीजेंसी हॉस्पिटल, कानपुर के सीनियर पल्मोलॉजिस्ट, डॉ ए के सिंह और एसआरएमएस, बरेली के प्रो डॉ राजीव टंडन शामिल रहे। वेबिनार के लिए पैनलिस्ट के रूप में हरि दया सुपर स्पेशलिटी सेंटर, प्रागराज के निदेशक डॉ आशीष टंडन;  रोहिलखंड मेडिकल कॉलेज, बरेली के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ रजत अग्रवाल और एमएलबी मेडिकल कॉलेज, झांसी के एसोसिएट प्रो और पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ मधुरमय शास्त्री उपस्थित रहे।

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