उत्तर प्रदेश में पहली बार लैब में तैयार सेल्स से यूरिथ्रल स्ट्रिक्चर का सफल इलाज अपोलोमेडिक्स ने रचा इतिहास
सेल-आधारित यूरिथ्रल स्ट्रिक्चर सर्जरी, मरीज अगले दिन हुआ डिस्चार्ज लैब में तैयार 50 लाख सेल्स से यूरिथ्रल स्ट्रिक्चर का सफल उपचार लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पहली बार लखनऊ के अपोलोमेडिक्स अस्पताल ने यूरिथ्रल स्ट्रिक्चर यानी पेशाब की नली के सिकुड़ जाने की समस्या से जूझ रहे एक मरीज का लैब में तैयार किए गए सेल्स की मदद से सफल इलाज किया है। डॉ. मयंक अग्रवाल, डॉ. वेद भास्कर और डॉ. शैलेंद्र गुप्ता की सर्जिकल टीम ने 30 वर्षीय मरीज का एडवांस्ड तकनीक से ऑपरेशन किया, जिसमें टिश्यू इंजीनियरिंग के जरिए लैब में तैयार किए गए सेल्स का इस्तेमाल किया गया। उत्तर प्रदेश में इस तकनीक का पहली बार उपयोग किया गया है। लखनऊ निवासी यह मरीज तीन सेंटीमीटर लंबी बुलबर यूरिथ्रा स्ट्रिक्चर से पीड़ित था। यह तकनीक यूरिथ्रल स्ट्रिक्चर के चुनिंदा मरीजों के लिए कम चीरफाड़ वाला एक नया और प्रभावी इलाज का विकल्प है। आमतौर पर इस बीमारी के इलाज के लिए डॉक्टर बक्कल म्यूकोसा ग्राफ्ट यूरेथ्रोप्लास्टी (बीएमजीयू) की सलाह देते हैं। इस सर्जरी में मरीज के मुंह के अंदर से करीब पांच से छह सेंटीमीटर टिशू निकालना पड़ता है। इसके कारण मरीज क...