मकर संक्रांति का ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व : महंत विशाल गौड़
मकर संक्रांति का ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व मकर संक्रांति पर्व का ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व है। मकर संक्रांति और उत्तरायण जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है तो उसे मकर संक्रांति कहते हैं और उत्तरायण वह दिवस है जब सूर्य की किरणें सबसे ज्यादा दक्षिण की ओर झुकने के बाद उत्तर की ओर लौटने लगती हैं। ऐसी मान्यता है कि इस दिन भगवान भास्कर अपने पुत्र शनि से मिलने स्वयं उसके घर जाते हैं। चूँकि शनिदेव मकर राशि के स्वामी हैं, अत: इस दिन को मकर संक्रान्ति के नाम से जाना जाता है। यह जानकारी देते हुए चौक कोतवालेश्वर महादेव मंदिर के महंत विशाल गौड़ ने बताया कि मकर संक्रांति, सनातन धर्म का अत्यंत पावन पर्व है। यह पर्व भारतीय जीवन और संस्कृति की गहन आध्यात्मिक धारा का प्रतीक है। जब सूर्य भगवान मकर राशि में प्रवेश करते हैं तब मकर संक्रान्ति का पर्व मनाया जाता है। इस खगोलीय घटना को ‘सूर्य का उत्तरायण’ कहा जाता है। उत्तरायण का अर्थ है, सूर्य का उत्तर की ओर यात्रा करना, जो जीवन में ज्ञान, ऊर्जा और सकारात्मकता का प्रतीक है। मकर संक्रान्ति केवल ऋतु परिवर्तन का पर्व नहीं, बल्कि जीवन को अंधकार से प्रकाश,...