हरितालिका तीज का आध्यात्मिक महत्व है:महंत विशाल गौंड
हरितालिका तीज भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा का एक अत्यंत पवित्र एवं महत्वपूर्ण पर्व है। यह पर्व मुख्य रूप से भगवान शिव और माता पार्वती के पवित्र मिलन, अटूट प्रेम, तपस्या और अखंड संकल्प का प्रतीक माना जाता है। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला यह व्रत विशेष रूप से महिलाओं द्वारा श्रद्धा और भक्ति के साथ रखा जाता है। हालांकि इसका महत्व केवल वैवाहिक सुख तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें गहरा आध्यात्मिक संदेश भी निहित है। हरितालिका शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है—'हरित' अर्थात हरण करना और 'आलिका' अर्थात सखी। पौराणिक मान्यता के अनुसार माता पार्वती की सखियाँ उन्हें उनके पिता द्वारा निर्धारित विवाह से बचाकर वन में ले गई थीं। वहाँ माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की। उनकी अटूट भक्ति, दृढ़ निश्चय और तप से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया। आध्यात्मिक दृष्टि से हरितालिका तीज हमें संकल्प की शक्ति का संदेश देती है। माता पार्वती का जीवन यह सिखाता है कि यदि मनुष्य का लक्ष्य पवित्र ह...